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ग्वालियर पर्यटन समाचार: चंबल संभाग की सत्रहवीं सदी की पोशाक में पर्यटकों को भोजन कराएंगे शेफ

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Gwalior Tourism News:ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। ग्रामीण वातावरण को परंपरा की विरासत माना जाता है। इसलिए मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड अब ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। अब गांव में आने वाले पर्यटकों को महाराज के परिधान में नहीं बल्कि सत्रहवीं सदी के पुरुषों और महिलाओं के परिधानों में भोजन कराया जाएगा। साथ ही यहां आने वाले पर्यटकों को कांच या धातु के बर्तन नहीं बल्कि तांबे और कांसे के बर्तन में खाना खिलाया जाएगा। चंबल संभाग की परंपरा को ई-बुक में लिखने का दायित्व आईएचएम ग्वालियर को सौंपा गया है। इसलिए आईएचएम की टीम चंबल संभाग के अंतर्गत मुरैना, भिंड और श्योपुर जिले के गांवों में घूम रही है और खोए हुए कपड़े व बर्तन को खोजने का प्रयास कर रही है. इस दौरान आईएचएम के शेफ नरेंद्र लोधी ने बताया कि 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है। पर्यटन विभाग ने चंबल संभाग के पारंपरिक परिधानों और बर्तनों के साथ-साथ बुक में डालने की जिम्मेदारी भी सौंपी है।

धोती और सफाई में नजर आएंगे शेफ

श्योपुर, मुरैना और भिंड के अटेर, मुस्तरा, महगाँव में पुरुष धोती-कुर्ता, साफा, मिर्जाई और बंदी लगाते थे। पर्यटकों को पारंपरिक परिधान में खाना परोसा जाएगा। गांव में आने वाले पर्यटकों को धोती-कुर्ता और साफा में शेफ और वेटर दिखाई देंगे। ऐतिहासिक काल के पारंपरिक परिधान गायब हो गए थे, लेकिन अब इन्हें फिर से लाया जाएगा।

लहंगे और ओड़नी में नजर आएंगी महिलाएं

इन गांवों में महिलाओं का पारंपरिक पहनावा लहंगा और चांदी की चूड़ियां, हाथ की पट्टी आदि के साथ गहने थे। ज्यादातर महिलाएं सिर्फ काले और लाल रंग के ही कपड़े पहनती थीं, जो अब पूरी तरह से गायब हो गए हैं। सैलानियों को परंपरा से जोड़ने के लिए रसोइया लहंगे, ओड़नी और हैवी ज्वैलरी में नजर आएंगी।

ये तीन गांव होंगे खूबसूरत

देश के चुने हुए खूबसूरत गांवों की तरह पर्यटन विभाग भी चंबल संभाग के तीन गांवों पर काम करने जा रहा है. इसके तहत अटेर, बिलपुर और काकनमठ गांवों को सुंदर बनाया जाएगा, जहां पर्यटक प्रकृति से जुड़ सकेंगे। बिलपुर की खासियत इसका क्रोकोडाइल नेचुरल ब्रीडिंग सेंटर है, जहां बड़ी संख्या में मगरमच्छ प्रजनन करते हैं, जिसे पर्यटक देख सकेंगे। इसके साथ ही पर्यटक छह माह बाद रिठौराकला, ऐंटी, मितावली और पड़ावली में रह सकेंगे।

आदर्श

पर्यटक पारंपरिक परिधानों और ऐतिहासिक बर्तनों को भी देख सकेंगे। इसके लिए आईएचएम ग्वालियर को अलग से ड्यूटी दी गई है। क्योंकि अंदाज भी शानदार था, अब पर्यटक एक जगह चंबल संभाग की जांच कर सकेंगे। साथ ही होम स्टे पर रहने वाले यात्रियों को ऐतिहासिक बर्तनों में भोजन कराया जाएगा और उनका स्वागत करने वाले ग्रामीणों ने भी पारंपरिक कपड़े पहन रखे होंगे।

मनोज सिंह, डायरेक्टर एमपीटीबी

Posted By: anil.tomar

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