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Gwalior music university foundation day: संगीत आत्मा की गर्मी को शांत करने का एकमात्र उपाय : राज्यपाल

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Publish Date: | Fri, 20 Aug 2021 07:15 AM (IST)

संगीत विश्वविद्यालय ग्वालियर का 14वां स्थापना दिवस समारोह राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने ऑन लाइन संबोधित किया

Gwalior music university foundation day: ग्वालियर। न्यूजीलैंड प्रतिनिधि। मधुर संगीत आत्मा को शांत और एकाग्र करता है। संगीत का स्वर, ध्वनि और भाव ईश्वर की आराधना की तकनीक है। भारतीय संगीत के प्रकार के बीज वैदिक काल में ही थे। सामवेद वैदिक भजनों का एक समूह है जिसे गाया जा सकता है। प्राचीन काल से भगवान की पूजा करने के लिए भजनों का उपयोग करने की प्रथा रही है। यज्ञ आदि के अवसर पर भी सामूहिक गीत हुए। मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने गुरुवार को संगीत विश्वविद्यालय, ग्वालियर के 14वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान वेब आधारित कार्यक्रम में यह बात कही। उन्होंने कहा कि स्कूलों को प्राथमिक शिक्षा में प्रभावी कला, संगीत और संगीत को शामिल करने में जानकारी व सहयोग देना चाहिए। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने देश के शिक्षण जगत को एक नया आयाम दिया है। हमारी प्रामाणिक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत ने विश्वव्यापी प्रथागत प्रशिक्षण प्रणाली के लिए सर्वोत्तम मार्ग प्रशस्त किया है। आवश्यकता नई सोच और सुधार के साथ प्रयास करने की है।

राज्यपाल ने कहा कि संगीत दो आत्माओं के बीच की अनंतता को भर देता है। मधुर संगीत आत्मा को शांत और एकाग्र करता है। संगीत केवल अवकाश नहीं है, यह परंपरा और सभ्यता को समृद्ध करता है। समाज और राष्ट्र परंपरा से निर्मित होते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय के विद्वानों से भारतीय लोक कलाओं की समृद्ध विरासत के संरक्षण और संवर्धन में उनके धार्मिक अनुसरण, विश्लेषण और सुधार के माध्यम से योगदान देने का आह्वान किया। भारतीय परंपरा की जीवंतता, निरंतरता और समृद्धि में योगदान दें। ग्वालियर सांसद विवेक नारायण शेजवलकर, कुलपति साहित्य कुमार नाहर, कुलसचिव कृष्णकांत शर्मा, प्रो. रंजना तोरपन आदि। वर्तमान हो चुके हैं।

-संगीत भगवान की पूजा का माध्यम है

पर्यटन, संस्कृति एवं आध्यात्मिक मंत्री उषा ठाकुर ने कहा कि संगीत ईश्वर की आराधना का माध्यम है। यह परंपरा की रीढ़ है। उन्होंने कॉलेज से आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करने की पहल करने का अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में 64 कलाओं की जानकारी के लिए तैयारियां की गई हैं। इन सभी कलाओं के संबंध में शीघ्र शिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ करने के संबंध में अधिकांश लोगों से मांग प्राप्त की जा रही है। उन्होंने कॉलेज से इस दिशा में पहल की संभावना तलाशने को कहा है।

Posted By: anil.tomar

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